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गाजीपुर की बेटी ने रक्षा क्षेत्र में क्रांति ला दी, थर्मोप्लास्टिक कचरे से कर दिया बड़ा काम

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गाजीपुर की बेटी पूजा सिंह ने दवा उद्योग के कचरे से स्मार्ट टेक्सटाइल्स बनाकर रक्षा क्षेत्र में क्रांति ला दी है। उन्होंने ब्लिस्टर पैक के एल्यूमिनियम और थर्मोप्लास्टिक कचरे को रीसायकल करके झटका-प्रतिरोधी कपड़ा बनाया है, जो सैनिकों की सुरक्षा और संचार में मददगार होगा।
उत्तर प्रदेश में गाजीपुर की बेटी डॉ अपराजिता सिंह उर्फ पूजा ने एक अभूतपूर्व नवाचार के साथ रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पूजा ने दवा उद्योग से निकलने वाले ब्लिस्टर पैक रद्दी एल्यूमिनियम और थर्मोप्लास्टिक का गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा को रीसाइक्लिंग के जरिए झटका-प्रतिरोधी और प्रवाहकीय स्मार्ट टेक्सटाइल्स में बदलने की तकनीक विकसित की है। यह नवाचार सैन्य उपकरणों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा दे रहा है।पूजा ने पर्यावरण पर औद्योगिक कचरे के बढ़ते बोझ और सैनिकों की सुरक्षा में तकनीकी प्रगति की आवश्यकता को देखते हुए इस परियोजना की शुरुआत की। उनका लक्ष्य ब्लिस्टर पैक रद्दी को उपयोगी सामग्री में बदलकर स्मार्ट मिलिट्री फैब्रिक्स विकसित करना था, जो सैनिकों की सुरक्षा, संवाद और स्वास्थ्य निगरानी में सहायक हो। इस प्रोजेक्ट में सामग्री विज्ञान, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और स्मार्ट टेक्नोलॉजी का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

उच्च शक्ति और लचीलापन

पूजा ने ब्लिस्टर पैक की केमिकल और मैकेनिकल स्ट्रक्चर का गहन विश्लेषण कर इसे रीसाइक्लिंग के लिए उपयुक्त बनाया। थर्मल प्रोसेसिंग और नैनो-कम्पोजिटिंग तकनीकों के जरिए इस कचरे को उच्च शक्ति और लचीलापन प्रदान किया गया। प्रवाहकीय गुणों के लिए ग्रेफीन और कार्बन नैनोट्यूब्स जैसे नैनोमटेरियल्स को वस्त्रों में समाहित किया गया। इसके अलावा, केव्लर और फोमयुक्त लेयरिंग के उपयोग से यह सामग्री झटका-प्रतिरोधी बनाई गई, जो सैन्य मानकों (MIL-STD) के अनुरूप टेंसाइल स्ट्रेंथ, अब्रेशन रेज़िस्टेंस और थर्मल स्थिरता प्रदान करती है।

सैन्य क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित होगा

पूजा ने इन वस्त्रों में बायो-सेंसर्स और लो-पावर कम्युनिकेशन मॉड्यूल्स को एकीकृत कर सैनिकों की हृदयगति, तापमान और तनाव स्तर की रीयल-टाइम निगरानी को संभव बनाया है। यह तकनीक सैनिकों की स्थिति और लोकेशन को ट्रैक करने में भी सहायक है। इस नवाचार के अनुप्रयोग सैन्य क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। पूजा के स्मार्ट टेक्सटाइल्स से बने कॉम्बैट यूनिफॉर्म सैनिकों के स्वास्थ्य और लोकेशन की निगरानी के साथ-साथ रणनीतिक संवाद को आसान बनाएंगे। इसके अलावा, यह सामग्री बुलेटप्रूफ जैकेट्स में अतिरिक्त सुरक्षा परत, डिफेन्स ड्रोन कवर्स और आपदा राहत गियर के रूप में भी उपयोगी है।

वेस्ट टू वैल्यू’ मॉडल के तहत उपयोगी

पर्यावरणीय दृष्टिकोण से यह प्रोजेक्ट ब्लिस्टर पैक जैसे कठिन रीसायक्लिंग कचरे को ‘वेस्ट टू वैल्यू’ मॉडल के तहत उपयोगी संसाधन में बदलकर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देता है। यह हरित रक्षा तकनीक का एक अनुकरणीय उदाहरण है, जो पर्यावरणीय बोझ को कम करते हुए रणनीतिक लाभ प्रदान करता है।

पूजा ने समूदाय को गौरवान्वित किया

गाजीपुर जैसे छोटे शहर से निकलकर पूजा ने न केवल स्थानीय समुदाय को गौरवान्वित किया है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के नवाचार को मजबूती दी है। उनकी यह उपलब्धि भारत की “आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली” और “स्वच्छ भारत” के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह शोध प्रारंभिक चरण में
पूजा का यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इसके प्रोटोटाइप ने रक्षा विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है। वह इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने और अन्य औद्योगिक अपशिष्टों के लिए समान मॉडल विकसित करने की योजना बना रही हैं।असंभव को संभव बनाया जा सकता
गाजीपुर की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और वैज्ञानिक सोच के साथ असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। पूजा का यह नवाचार न केवल भारत की रक्षा शक्ति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक मिसाल कायम करेगा। एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में अपराजित ने बताया कि उन्हें अपने इस इनोवेशन के लिए भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय से प्रशस्ति पत्र भी मिला है।

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Jitendra Maurya

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